आज कल एगो बात मोर करेज के कचोहता

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आज कल एगो बात मोर करेज के कचोहता ,
सोचत बानी काहे भारत सभ्यता के खोवता,
पुज्यनीय नारी के काहे होत बावे प्रतिकार,
आम बात हो गइल छेडखानी,हत्या, बलात्कार,
फिर भी भारतिय सब काहे सुखद नींद सोअता,
सोचत — — — — — — — १
दुनिया भर मे बड दर्जा होला महतारी के,
उहो त स्वरुप बाडी स्वयं एगो नारी के,
का माता पर भी वासना के नीच नजर मोहता,
सोचत — — — — — — — २
बाँधी राखी कलाई प सुरक्षा के जे ले ली वचन,
उनही जइसन केतनन इज्जत होला रोज दफन,
क्या होइ घटना खुद के साथ का इहे सब जोहता,
सोचत — — — — — — — ३
बनके श्रेष्ठ मानव सबही इ गलती के ली सुधार,
नारी के कारण ही सुन्दर रुप मे बा इ संसार ,
नारी पीड़ा ‘संग्राम’ खातिर हर हृदय के टोअता,
सोचत — — — — — — — ४

  • संग्राम ओझा “भावेश”

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