“कवनो भरोशा नइखे”

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काँहें अझुराइल बाड़s छोड़s मोहँ माया के,
कवनो भरोशा नइखे एहँ माटी के काया के

कुछ नाही मिली तोहके जइबs खाली हाथ हो,
अचको ना जाई कुछो तनिको तोहरा साथ हो
राखँs नजरिया आपन सभका पs दया के……..
कवनो भरोशा नइखे एहँ माटी के काया के

उड़ जाई तोता एक दिन पिजरवा के छोड़ के,
दुनियाँ के सभ रिस्ता नाता के तोड़ के
काँहें तरसाव ताडs जीते जी बाया के………
कवनो भरोशा नइखे एहँ माटी के काया के

जनि अपराध करs ना बोलs कुबोलि के,
दीपक तिवारी साँच कहें बात खोली के
करs कुछ अइसन की लोग तरसे तोहरा छाया के………….
कवनो भरोशा नइखे एहँ माटी के काया के

जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया

दीपक तिवारी, श्रीकरपुर, सिवान।

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