जल्दी तूरअ अपना पिंजरा से नाता सुगना

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मन, धन नेतवन के रोजे भइल जाता दुगना,
जल्दी तुरअ अपना पिंजरा से नाता सुगना।

छोड़ले बाड़ तू ढिल्ली, कहेलेसँ भींजल बिल्ली,
माल मारि- मारि पत बे कहे लेसँ लिली लिली।
मुँह खोल$ कुछुओ बोल$, नीमन बाउर के तोल$,
तोहरे हिस्सवे में बखरा बटाता सुगना।
जल्दी तुरS अपना पिंजरा…………………….

तुरअ पिंजरा के मोह, जिनिगी भइल पनरोह,
बुद्धि बैल लेखा होखे, तन भइल जाता गोह।
मुँह प बजेला बतीसी, गलल जाता सँउसे नोह,
दाता रोवे देख लS, मंगता अघाता सुगना।
जल्दी तुरS अपना पिंजरा………………….

आपन पाँख तू फैलाव$, तनी नज़र अब घुमाव$,
बुद्धि आपन खूब भिड़ावS, बहकावा में जनि आव$।
बढ़ी राहजनी छिनइती, घरे पहुँची ना चइती,
फेरु चले लागी दन दन भाला, काता सुगना।
जल्दी तुरS अपना पिंजरा………………………..

✍️ विमल कुमार,
जमुआँव, भोजपुर, बिहार।

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