दुलरूआ

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तोहरी दुलरूआ के
बिगड़ल बा चाल हो
जसोदा इनकी चलते
एक दिन बवाल हो |
जानी हम पानी भरे
आवेने लुकाइ के
मटुकी हमार फोरने
ढेलवा चलाइ के
इनके चोनाइल एक दिन
हो जाई काल हो ||
सहले के सीमा होला
अब ना सहाई
दहिया हमार खइलें
मोहने चोराई
गालवा पर चटकन मारबि
हो जाई लाल हो ||
लइका तोहार भागल
हाथवा मरोरि के
तोहरा से कहअ तानी
दूनू हाथ. जोरि के
मना जो ना करबू फल
पइहें नन्द लाल हो ||

 

  • नन्देश्वर मिश्रा

 

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