धरती पर उहे नू महान बा

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धरती पर उहे नू महान बा
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कुछू पर कबो ना जेकर बिगड़त ईमान बा।
सचमुच   में  धरती  पर  उहे  नू महान  बा।

भजत भगवान बा, क़रत नेकी दान बा।
हर-हर में हरि जी के, क़इले धेयान बा।
सबकेभलाई क़रत,सझिया -बिहान बा।
सचमुच में  धरती  पर उहे नू महान बा।

नीमन हरदम बोलता,साँच से ना डोलता।
धरम के  मरम जे, बात -बात में ख़ोलता।
पाप निन्दा बाउर से  हरदम सावधान बा।
सचमुच  में  धरती  पर  उहे नू महान  बा।

दुसरा  के   भरता, केहू  पर  ना जरता  
बात देके  केहुए  के पीछे नाहीं टरता।
छल कपट तनिको ना मीठा जुबान बा।
सचमुच में  धरती पर उहे नू महान बा।

मन में ना राखत कवनो कसर कोर बा।
जेने जाता  चारु ओर करत अजोर बा।
नेकी  भलाई  के  देह जेकर  खान बा।
सचमुच  में धरती पर  उहे नू महान बा।

चाहे नाहीं आदर -मान, सेवा में बसे  परान।
जहरो जे पी के हरदम करत बाटे मुसकान।
झूठ पर ना “बाबूराम कवि “जेकर कान बा।।
सचमुच  में  धरती   पर  उहे  नू महान  बा।


बाबूराम सिंह कवि
ग्राम -बड़का खुटहाँ, पोस्ट -विजयीपुर (भरपुरवा)
जिला-गोपालगंज (बिहार) पिन -841508

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