भोजपुरी गजल

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समय के साथ चल दीं फिर नयन में लोर मुश्किल बा।
अन्हरिया राह में काँटा कसक के जोर मुश्किल बा।

समय के साथ अनबन बा उहे परिसान होखेला,
धरावल हाथ उनुकर सारथी के डोर मुश्किल बा।

पवन के पालकी पर जे चढ़ी ऊ मात ना खाई,
रही घर के चुहानी जे तिन्हें हर ओर मुश्किल बा।

दुपट्टा देखके नीयत अगर दो फाट हो जाई,
समझ लीं घुप्प जिनगानी उहाँ अंजोर मुश्किल बा।

बनाईं प्रेम के रसरी समरपन सूत दे दे के,
भले होई सिकाइत पर समर घनघोर मुश्किल बा।

सुसासन राम राजा जस सदा परतोख देला लो,
रसिक अपराध करके साथ में हथजोर मुश्किल बा।

दसहरा में सभे दसकंधरे के दोस देवेला,
मगर साथे रही रावन त फिर गठजोर मुश्किल बा।

✍️कन्हैया प्रसाद रसिक
बंगलोर

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