भोजपुरी सबद संपद – भाग-३

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(थोड़ा बदलाव कइनीं। सबद के मूल ज्ञात होई त उहो देवे के कोसिस करबि। संकेत रही सं=संस्कृत, प्रा=प्राकृत, दे=देशज, अ=अरबी, फा=फारसी।)
नीनि-( सं-निद्रा) नींद।
मतारी-(सं- महत् आर्या) माई।
गहिर-(सं-गंभीर) गहरा।
मउर-(सं- मकुट) मौर।
सहिजन-(सं-शोभाञ्जन) – एक पेंड़ जेकर फली के
सब्जी बनेला।
अवरू-(सं- अपर) और, दोसर।
दिआरी- (सं-दीपावली)
कोठारी- (सं-कोष्ठागारिक) छोट कमरा।
भंडारघर।
गाभिन- (सं- गर्भिणी) गर्भवती।
बिया- (सं-बीज)
इमिर्ती- (सं-अमृतिका) इमरती।
आजी- (सं-आर्यिका) दादी।
कियारी- (सं-केदारिका) क्यारी।
पीठा- (सं-पिष्टक)पाहुन- (सं-प्राघूर्ण) जीजा।
गहूँ- (सं- गोधूम) गेहूँ।
सेवार-( सं-शैवाल)एक जलीय पौधा।
सेन्हि-(सं-सन्धि) सेंध।
ओसरि- (सं- अवसर)
ओहार-(सं-अवधार) पर्दा।

✍ दिनेश पाण्डेय,पटना

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