मुश्किल बा

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भोजपुरी गजल

छिटिक के बात जब भुइँआँ गिरे संगोर मुश्किल बा।
बिखेरल तोर के दाना सरीखे घोर मुश्किल बा।

करीं लाखन उपायो बात बिगरी ना सम्हर पावे।
कहल केहू कि फाटल दूध अस गँठिजोर मुश्किल बा।

तबो कुछलोग अइसन बा जे बाते के रहें चुभुला।
कहीं रउए अदंते मुँह कतिक लट्टोर मुश्किल बा।

तनी सोचीं लमारल बात के नीमन कही केहू?
रबर अस घींच के छोड़ल बुझीं जे थोर मुश्किल बा।

मुसुक के आँख मटका के न जाने का टुभुक गइली।
गड़ल छब मन मधे अइसन परावल भोर मुश्किल बा।

चली बेबात के बतिया त निसबत रात के दर का?
दबा के होठ से पल्लू लड़ावल ठोर मुश्किल बा।

रहे दीं बात के बावत अनेरे बात बढ़ जाई।
बढ़ा के बात के बाती सिरावल लोर मुश्किल बा।

✍️ दिनेश पाण्डेय,
पटना।