राम कथा- लंका में रावन पर विजय का बाद सिरीराम जी अवध में आ के

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लंका में रावन पर विजय का बाद सिरीराम जी अवध में आ के रामराज की अस्थापना का बाद गोलोक चलि गइनीं। गोलोक में बहुत दिन रहतरहत जिउ अगुता गइल त सोचनीं कि चलीं तनी मिर्तुलोक में घुमि आईं, देखीं अजोधिया के राज कइसन चलता? लोगबाग त रामराज में खुस होखबे करी? हम त अइसन बेवस्था बना के आइल बानीं कि बिना कवनो हरहरपटपट के सभे आनन्दे में होई?
खैर, इहे सोचत उहाँ का मिर्तुलोक में चहुँप गइनीं। उहाँ का अदृश रहिके सबकुछ देखे लगनीं। मिर्तुलोक के हाल देखके सोचे लगनीं कि हम सचहूँ रामराज के अस्थापना कइले रहनीं कि झूठहूँ? हई देखs, हमरे नाम पर सब धंधा चलि रहल बा। हऊ कुछलोग के मंडली कहता कि राम कबो भइले ना रहलें। माने, पक्षविपक्ष सभे हमरे नाम ले के जिअता। खैर, ठीके बा। चलीं आगे।
कुछुए दूर आगे बढ़नीं तले रावन लउकि गइल। रामजी अचरच में परि गइनीं। सोचे लगनीं कि एकरा के त हम त्रेते में मुआ दिहनीं, ए कलजुग में कहाँ से आ गइल?
तले रावनो रामजी के देखि लिहलसि आ दउरि के रामजी का गोड़ पर गिर परल। कहलसि कि हे प्रभु जी! रउरा ए कलजुग में ए धरती पर का आ गइनीं? इहाँ राउर कवन गरज बा?
रामो जी इहे बात रावन से पूछि दिहनीं कि तू का करतार?
रावन जइसन बलशाली आ पत्थलदिल राकस लगभग रोवत कहलसि कि हे रामजी! एही बेरा हमार सबसे जिआदे गरज बा, ए धरती पर। रामजी फिनु अचरज में परि के पूछनीं कि काहें? तहरा अइसन राकस के का गरज परि गइल?
रावन कहलसि कि हे दसरथनन्दन! हम हमेसा राउर भक्त रहनीं। सीताहरण से लेके अपना मरला तक ले जेतना नधना नधनीं, सब देखावटी रहे। ई मति बुझीं कि खाली रउरे लीला करिले। हमहूँ अपना साथे अपना कुलपरिवार के तरन्तारा खातिर रउरा से देखावटी वैर नधले रहनीं। रामजी कहनीं कि हम सब जानत रहनीं। लेकिन, ए बेरा इहाँ का होता?
रावन कहलसि कि हम राउर भक्त हईं, ई त जानिए गइनीं। राउर भक्त हईं त राउर नाम केहू लेहनिहार ना रहे, ई हमरा बरदास नइखे। अगर, हमार माने रावन के डर ना होखे त इहाँ रउरा के केहू पूछवइया नइखे। ई सब हालत देखिके हम बहुत दिन पहिलहीं इहाँ आ गइनीं। कवनो ना कवनो रूप में आपन हजिरी जना देनीं आ लोग रउरा के गोहरावे लागेला।
रामजी कहनीं कि ई हालि बा? राम राम का गुन आ मरजादा से ना, रावन का डरे इयाद कइल जातारें? त ठीके बा, तू इहवें रहs आ हमके अपनी जगह पर जाए दs। वोइसे, हमरा कवनो इछा नइखे कि लोग हमार नाम लेबे करो।
रामजी पलटि के अंतर्धान हो गइनीं। रावन आपन डिउटी करे लागल आ अइसन करे लागल जइसन ओहू जनम में ना कइले रहे। लोग जोरजोर से, इहाँ तक कि लाउडस्पीकर लगाके रामराम चिलाए लागल। रामजी नियरा होखीं, तब नू सुनीं।

@संगीत  सुभाष 

 

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