विधा_सवैया(विसय_पावस)

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*मत्तगयंद_सवैया (ऽ।।×7 +ऽऽ)*

पावस मास सखी अति भावन
अंबर से बदरी बरसेली।
मेघ लखे बन मोर नचे जल
बूंद गिरे धरती हरसेली।
ताल तलाब तरे जल से घर
आँगन के तुलसी सरसेली।
साजन जी परदेस बसे धनि
सेज परे छछने तरसेली।

*मदिरा_सवैया (ऽ।।×7+ऽ)*

सावन मास सुहावन हो नभ मेघ लगे
जल धार गिरे।
नीर भरे सरि सागर में सरिता तरनी
अरु नार तरे।
केकि नचे बन बागन में अहरा जल
दादुर तान तुरे।
खेतन में हरफार चले कृषि कारज
घाम किसान करे।।

*किरीट_सवैया( ऽ।।×8)*

फागन में अनुराग झरे सखि
सावन बूंद सुसार गिरावत।
दादुर टर्टर सोर करे झन
झिंगुर राग मलार सुनावत।
साजन खेत बधार करे पर
साँझ परे घर वापस आवत।
नार सिंगार पटार सजे कजरा
गजरा गर हार लगावत।।

*अरसात_सवैया (ऽ।। ×7 × ऽ।ऽ)*

वारि लगे भुवरा करिया बिजुरी चमके नभ
में डरवावनी।
नीर झरे गिरि ऊपर में तरनी कलनाद लगे मन भावनी।
खेत बधार पथार तरे बन बाग लगे अति मोहक लावनी।
लावन री मनभावन री अति पावन मास सुहावन सावनी।।

*चकोर_सवैया (ऽ।। ×7 + ऽ।)*

घेरत बादर सावन में बरसावत शीतल
नीर फुहार।
झींगुर नादत आहर में सुर दादुर टेरत
राग मलार।
मंद समीर बहे अति शीतल नीर बहे जमुना
सरि धार।
गावत गीत गवाल गवालिन झूलत श्याम
रमा तरु डार।।

*दुर्मिल_सवैया (।।ऽ ×8)*

जलवायु सुहावन लावन हो
छनि शीत लगे छनि घाम लगे।
बन सागन जामन पात हरे
सखुआ बर सुंदर आम लगे।
छवि लावन सी नयना निरखे
बसनी बननी सुललाम लगे।
तर नीर समीर लगे तन में
मन में रति के पति काम जगे।

*सुमुखी_सवैया (।ऽ। + 7 ×।ऽ)*

सुहावन मास बुनी बरसात
परे दिन रात सुसावन में।
लगे नभ मेघ करे अनुनाद
झरे सुख आब सुसावन में।
नदी झरना अहरा भरि जात
किसान अघात सुसावन में।
हिया हरखे लखि के कयनात
छटा अभिराम सुसावन में।

#अमरेन्द्र कुमार सिंह,
आरा, भोजपुर, बिहार।

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