भोजपुरी कहानी

बात कुछ ना रहे तबो बोलीं

बात कुछ ना रहे तबो बोलीं। बेवजह कान में जहर घोलीं। ना खलेटी कहीं हवें तर-पर, फेरु काहे जुबाँ अधर तोलीं। लंगई बेपरद त का हरजा, चैन से ऐन...

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भोजपुरी कविता