गोंसारी क भूजा

गोंसारी क भूजा भुजावल मन से ना बिसरे कबहूँ। कचका चाउर रहतो फाँकीं, छिटतो जाईं ना डर तबहूँ। बेर-बेर बरिजे माई कि जूठ न करिहे खबरदार। ओकर कहल...

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भोजपुरी कविता