Tag: श्लेष अलंकार

पुतरी में बसेला परान

सोने के हिड़ोलवा पे काठ के ललनवा झुलना झुलेला सारी रात हो... निरहू गइल बाड़े पूरबी बनिजिया छोड़ि के गँउआ जवार हो... माई बेचारी लुगरिया के तरसेली रोइ...

चिरई के जियरा उदास

कउना रे सुगनवा के पनिया पियवली कउना रे बछियवा के घास कउना रे बटोहिया पे मनवा लोभाइ गइल जागल सपनवा में आस कउना रे पंडितवा...

बिदाई गीत

सीकिया कै डड़िया फनाइदा मोरे बिरनू भिनही चलब आपन घाट हो मियना के परदा उठाइ के जो निरेखब लउकी आपन छुटल बाट हो अमवा तरे अब न कुहुकि कोयलिया सूखि...

घर बदलल, जर बदलल – बदल गइल रहन

ई साँच बा कि समय के साथ सोच शरीर आ आसपास के आमखास कुल्हिए कुछ ना कुछ बदलि जाला । ई बदलाव देखि के...

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भोजपुरी कविता