Tag: संगीत_सुभाष जी के कुल्हिये रचना पढ़े खातिर क्लिक करीं

पुरूबी के जन्मदाता महेन्दर मिसिर – बेरी बेरी नमन

मिश्रवलिया, जलालपुर की धरती के नमन, जहाँ आजुए का दिन अर्थात १६ मार्च १८८६ के भासा में एगो जबरदस्त, अदभुत आ अनूठा गायनशैली...

अंतरास्टी महिला दिवस

'ई बिहाने-बिहाने मोबाइल ले के का बइठि गइनीं? जाईं, थोरे मटर के चेंवटा उखारि ले आईं। निमोना खाए के मन करता आ गाइ के...

बथुआ

फुलेसर उदास, गुमसुम आ पता ना का सोचत दुआर पर बइठल रहलें, लागे जइसे कवनो रतन भुला गइल होखे। ओही बीचे हमेशा लेखाँ अपनी...

फागुन_आवत

फागुन नाचत, गावत आवत। अगुवानी में आगे-पाछे सकल चराचर धावत। विविध रंग के फूल धरा पर,अँजुरिन छिटत, बिछावत। गोद भरत नवकी फसिलिन के, तनमन सब हरखावत। बाँटत, देत,...

बसंती आगम

चहुँओरिया छवलसि हरियरी, बसंती आगम जनाता। गोरी बेसाहेली चुनरी, बसंती आगम जनाता। मोंजरि का अँचरे लुकाइल टिकोरा तितली कुलाँचेले भँवरा का जोरा मांगेली नगवाली मुनरी, बसंती आगम जनाता। तीसी...

दतुअन

धन्यवाद, ओ अदिमी के, जे दाँत आ मुँह की सफाई खातिर दतुअन के खोज कइल। ना त, लोग लोग का नियरा जाए का पहिले...

कुजाति

ई ओ बेरा के कहानी ह, जवना बेरा सामाजिक नियम तूरला पर तूरेवाला के जाति से निकाल दिहल जात रहे आ कुजाति कहल जात...

#लाठा_पंडित#

गाँव के नाँव निपढ़वा. पुरहर आबादीवाला गाँव में एक घर पंडी जी के. गाँव का नाँवे का हिसाब से बारी के बारी चउरिए रहे,...

हीत-गन

फुलेसर किहाँ हीत आ गइलें। जर- जलपान का बाद फुलेसर पूछलें- 'आछा, बतावल जा भोजन का बनो?' हितऊ कहलें- 'आरे, का अबे भोजन का झंझट...

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