Tag: संगीत_सुभाष जी के कुल्हिये रचना पढ़े खातिर क्लिक करीं

फूल मुरुझात से, सुखि गइल पात से(ग़जल)

फूल मुरुझात से, सुखि गइल पात से कवनो बगिया सजवला से का फायदा? तेल कतनो भरे, रात भर ना जरे दीप अइसन जरवला से का फायदा? ऊँच कतनो...

ताल – गाल

'असों बसंतपंचिमी के त जोरदार ताल बाजल ए फुलेसर भाई!' 'हँ बाबू भुवर, ताल त बाजल।' 'ताल का साथे झाल आ नाल। हँ त जोरदार फगुआ...

बिदेसी

'हलो, भुवर बोलतारें?' 'हँ, ए फुलेसर भाई! हम भुवर बोलतानीं, सैखोवाघाट, आसाम से। कहS, का हालचाल बा? कइसे मन परलS ह?' 'बाबू! बखार भर बधाई तहरा...

जिनिगी

सझुराईं, अझुराइल जिनिगी लाटा अस लटिआइल जिनिगी कहाँ से आवे, जाले कहवाँ कहवाँ रहे लुकाइल जिनिगी छान्हि, नून, लुगरी के चक्कर; चक्कर में चकराइल जिनिगी दउरत, भागत जोहीं रोजो जाके...

रहि रहि हिय अकुलात

रहि रहि हिय अकुलात, परल मन मनमीता के बात। मूरति सूरति अँखियाँ चमकत सँवरल केश भाल अति दमकत मँहमँह मँहकत गात। सहमत राखत पाँव धरनि पर सकुचत बोलत बयन मृदुल...

पुरूबी के जन्मदाता महेन्दर मिसिर – बेरी बेरी नमन

मिश्रवलिया, जलालपुर की धरती के नमन, जहाँ आजुए का दिन अर्थात १६ मार्च १८८६ के भासा में एगो जबरदस्त, अदभुत आ अनूठा गायनशैली...

अंतरास्टी महिला दिवस

'ई बिहाने-बिहाने मोबाइल ले के का बइठि गइनीं? जाईं, थोरे मटर के चेंवटा उखारि ले आईं। निमोना खाए के मन करता आ गाइ के...

बथुआ

फुलेसर उदास, गुमसुम आ पता ना का सोचत दुआर पर बइठल रहलें, लागे जइसे कवनो रतन भुला गइल होखे। ओही बीचे हमेशा लेखाँ अपनी...

फागुन_आवत

फागुन नाचत, गावत आवत। अगुवानी में आगे-पाछे सकल चराचर धावत। विविध रंग के फूल धरा पर,अँजुरिन छिटत, बिछावत। गोद भरत नवकी फसिलिन के, तनमन सब हरखावत। बाँटत, देत,...

बसंती आगम

चहुँओरिया छवलसि हरियरी, बसंती आगम जनाता। गोरी बेसाहेली चुनरी, बसंती आगम जनाता। मोंजरि का अँचरे लुकाइल टिकोरा तितली कुलाँचेले भँवरा का जोरा मांगेली नगवाली मुनरी, बसंती आगम जनाता। तीसी...

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