Tag: #संगीत_सुभाष

बिदेसी

'हलो, भुवर बोलतारें?' 'हँ, ए फुलेसर भाई! हम भुवर बोलतानीं, सैखोवाघाट, आसाम से। कहS, का हालचाल बा? कइसे मन परलS ह?' 'बाबू! बखार भर बधाई तहरा...

जिनिगी

सझुराईं, अझुराइल जिनिगी लाटा अस लटिआइल जिनिगी कहाँ से आवे, जाले कहवाँ कहवाँ रहे लुकाइल जिनिगी छान्हि, नून, लुगरी के चक्कर; चक्कर में चकराइल जिनिगी दउरत, भागत जोहीं रोजो जाके...

रहि रहि हिय अकुलात

रहि रहि हिय अकुलात, परल मन मनमीता के बात। मूरति सूरति अँखियाँ चमकत सँवरल केश भाल अति दमकत मँहमँह मँहकत गात। सहमत राखत पाँव धरनि पर सकुचत बोलत बयन मृदुल...

पुरूबी के जन्मदाता महेन्दर मिसिर – बेरी बेरी नमन

मिश्रवलिया, जलालपुर की धरती के नमन, जहाँ आजुए का दिन अर्थात १६ मार्च १८८६ के भासा में एगो जबरदस्त, अदभुत आ अनूठा गायनशैली...

फागुन_आवत

फागुन नाचत, गावत आवत। अगुवानी में आगे-पाछे सकल चराचर धावत। विविध रंग के फूल धरा पर,अँजुरिन छिटत, बिछावत। गोद भरत नवकी फसिलिन के, तनमन सब हरखावत। बाँटत, देत,...

बसंती आगम

चहुँओरिया छवलसि हरियरी, बसंती आगम जनाता। गोरी बेसाहेली चुनरी, बसंती आगम जनाता। मोंजरि का अँचरे लुकाइल टिकोरा तितली कुलाँचेले भँवरा का जोरा मांगेली नगवाली मुनरी, बसंती आगम जनाता। तीसी...

#लाठा_पंडित#

गाँव के नाँव निपढ़वा. पुरहर आबादीवाला गाँव में एक घर पंडी जी के. गाँव का नाँवे का हिसाब से बारी के बारी चउरिए रहे,...

हीत-गन

फुलेसर किहाँ हीत आ गइलें। जर- जलपान का बाद फुलेसर पूछलें- 'आछा, बतावल जा भोजन का बनो?' हितऊ कहलें- 'आरे, का अबे भोजन का झंझट...

जड़ी बूटी से इलाज

प्राचीन समय में जब अँग्रेजी दवाई के प्रचलन नेपाल में ना रहे तब वैद्य (Doctor,चिकित्सक)लोग आपन अनुभव आ अनुसंधान के आधार पर बहुते ...

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भोजपुरी कविता