हमर अशांत मन....
हमर अशांत मन कुछ करल चाहता
आशा के बोझ तले दब छोट लइका नियन
ठूठ हो चुकल पेड़ के अंतिम सुखल पत्ता नियन
ऊपर उड़...
बसंती दोहा
फुला गइल बा खेत में,पीयर दग-दग फूल।
राह निहारत दिन बितल,साजन गइलें दूर।।1
तीसी सरसों खिल उठल, बहल बसंत बयार।
पिय के पाती पाइ के,हिया भइल...
*बसंत__बिरह*
*मधुमोदक छंद*
*211 211 211 22*
राग वसंत तरे तर लेसे।
फागुन...
बासंती दोहा (भोजपुरी)
इरिखा, कपट, कुटिलपना, भरल हिए कंजास।
ना स्वागत नवपुष्प के, समुझी का मधुमास?
अगराइल गोरी चले, पगलाइल श्रीमंत।
लागत बा ए गाँव में, आइल...
बबुआ चानी काटे रानी संग जवानी में
रहे राजधानी में ना।।
बीबी लोल लाल रंगवावे।
खाना ...
*पदपादाकुलक_छंद*
समताप शीत वातायन में।
दिनकर अइलन उतरायन में।।
लखि सकल चराचर चहल...
प्रीत रीत विध तजि बात बतिआइना।
कविता बेतुक के रात दिन गाइना।
धधकता आग उर सुर अब बेराग बा।
नेह ...
हरियर धरती के दगदग पीयर रंग में रंगेवाला, ठूँठ फेंड़ में पचखी फेकावेवाला,...
"राम खेलावन"
जहवाँ देखस झींटे लायक
उहवाँ ई जल्दी से लपकस।
जहवाँ देखस फँसल झगरा,
उहवाँ त जल्दी से टपकस।।
ट्रेन में बिना टिकट के चढ़sस
हर टीशन पर झाँकत...
सारा रा रा रा
जोगीरा सारा रा रा रा ।।
कागज कलम भूल गइल अब
बदल गइल सभ लूर।
लैप ...
सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक 31 (जुलाई-सितम्बर 2026)
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अनुक्रम
संपादकीय
•उड़ल जाला बदरा-उमेश चौबे "अश्क“/80
•संपादकीय - डॉ अनिल चौबे...







