मोर_गँउवा

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गते गते जाता बिलात मोर गँउवाँ।
देखीं बिलाताटे फेड़न के छँउवाँ।

भइल मोरा गाँव में कइसन बवाल
धरे वाला हँसुवा धइले बा नाल
बात तनिको अब सहात नइखे
जाता कचहरी छोट बात धइके
माटी जाता मिलल देखली नउवा
गते गते जाता बिलात…………. ।1।

रगड़ा आ झगड़ा के रोज चले आन्ही
टांगल दूनाली बा देख लिहीं कान्ही
जलन आ डाह में अदमी भुजाता
पुरनियन क पेट अब आफत बुझाता
देख ककरहट के उखड़ता पँउवा।
गते गते जाता बिलात………….।2।

डाँड़ के झगरा में खेत छुटल परती
झरी झरी लोरवा बहावतिया धरती
भाई सहोदर भी भइलें पराया
अँखिया से गायब भइल लाज हाया
जाता ढिमलाइल पुरखन के ठँउवा।
गते गते जाता बिलात………….।3।

✍️ तारकेश्वर राय “तारक”
सोनहरिया, गाजीपुर
उत्तरप्रदेश

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