पदपादाकुलक छंद

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*पदपादाकुलक_छंद*

समताप शीत वातायन में।
दिनकर अइलन उतरायन में।।
लखि सकल चराचर चहल पहल।
हेमंत लजा के भागि चलल।।

सरसो बधार पियराय गइल।
बागन बसंत बगराय गइल।।
नभ नील बरन नीलभ अलसी।
लखि प्रकृति रूप हियरा सरसी।।

पिक आम डारि पर सोर करे।
मधुगीत प्रीत उर जोर करे।।
रतनार खिले सखि बागन में।
धनिया तरसे तर आगन में।।

पिय काम धाम परदेस करे।
रति काम बिना हरमेस जरे।।
ऋतुराज फाग उर राग भरे।
धनि कंत संग सुख सेज परे।।

अमरेन्द्र कुमार सिंह
*भोजपुरी_कलम_कार्यशाला*
आरा भोजपुर बिहार