फूल मुरुझात से, सुखि गइल पात से(ग़जल)

0
866

फूल मुरुझात से, सुखि गइल पात से
कवनो बगिया सजवला से का फायदा?
तेल कतनो भरे, रात भर ना जरे
दीप अइसन जरवला से का फायदा?

ऊँच कतनो महल भा अटारी रहे
खूब पसरल रतन धन दुआरी रहे
मन कहे ना झुकबि ना करबि बंदना
माथ झुठहूँ झुकवला से का फायदा?

खूब हल्ला मचल ऊ पियासे मरल
ताल कुँइया नदी सब लबालब भरल
नाहिं पहुँचल कुआँ खुद लगे आइ के
तब पियासल कहवला से का फायदा?

डेग सङ ना उठावे गरज जब परी
पास आवे ना देखत दरद के घड़ी
चोट पर चोट मारे हिया की जरी
मीत अइसन बनवला से का फायदा?

शब्द सुन्नर सहेजल सजावल रहे
पाँति में रंग-ऐपन बिछावल रहे
पीर के नाद उठि के न गुंजल जले ,
गीत अइसन सुनवला से का फायदा?

संगीत सुभाष

✍संगीत सुभाष,
मुसहरी, गोपालगंज।