मुक्तक

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काहे लोगवा अपने घर में, अपने हाँथे आग लगावे?
काहे देश के झंडा के, कीमत ऊ तनिको समझ न पावे?
तनिको मोह ना बा देसवा से, इज्जत तारे तार क देता,
काहे आपन जिद्द ना छोड़े, भले देस के मान घटावे?

अखिलेश्वर मिश्र