जब से अइली कनिया घर में। तब से बबुआ रहता डर में।। सुनिना कि कबो...
ओढ़ के हितई क चादर बोल बोले सान से कब मिली पलखत करेजा काट ली बरदान से दू तरह के आदमी मिलिहें इहाँ संसार में एक...
आजकल दिन बेरुखा बा धूप बोझिल अनमनी। साँस के आवारगी में चिंतना के रहजनी। पेड़ के छाँही सकोचल धूँध अइसन बढ़ रहल। आँखि के पुतरी प चिनगी...
वज़्न- 2122 1212 22 लोर मथि के रतन निकारे के। आँखि अइसन कबो न मारे के। आप ...
तीर घवाहिल कर दिहलस ललटेनियो त फुटलहिए बा। कवनो दल में बल नइखे सबसे नीमन निरदलिए बा।। कस बल हाथ के ढील भइल हाथी उलटल मुहकुड़िए बा। कवनो दल में...
मन, धन नेतवन के रोजे भइल जाता दुगना, जल्दी तुरअ अपना पिंजरा से...
गते गते जाता बिलात मोर गँउवाँ। देखीं बिलाताटे फेड़न के छँउवाँ। भइल मोरा गाँव में कइसन बवाल धरे वाला हँसुवा धइले...
घटना लगभग चालीस बरिस पुरान ह। फुलेसर आ उनुके लंगोटिया इयार बुधन का देउरिया नैना टाकीज में जा के बाबी फिलिम देखे के मन...
बिटोरन अपना इस्कुल के  तेज बिदारथी रहन आ गाँवों में उनुकर दिमाग के लोग परतोख देत रहे । उनुकर लंगोटिया इयार बेकहल के "...
1- पतली कलाई मधे चूरी बाटे लाल लाल बिंदिया के धाह देख सुरूज लजइले । इचिका घुँघट पट झट देनी हटल त देखते चनरमा लजाइ...

सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक 31 (जुलाई-सितम्बर 2026)

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सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक अंक 31 ( जुलाई-सितम्बर 2026) के डाउनलोड करे खातिर क्लीक करीं अनुक्रम संपादकीय •उड़ल जाला बदरा-उमेश चौबे "अश्क“/80 •संपादकीय - डॉ अनिल चौबे...

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