रहि रहि हिय अकुलात,
परल मन मनमीता के बात।
मूरति सूरति अँखियाँ चमकत
सँवरल केश भाल अति दमकत
मँहमँह मँहकत गात।
सहमत राखत पाँव धरनि पर
सकुचत बोलत बयन मृदुल...
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सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका (अक्टूबर-दिसम्बर २०१९) अंक के डाउनलोड करे खातिर क्लिक करीं
ई-पत्रिका
जय भोजपुरी जय भोजपुरिया के पांचवां स्थापना दिवस के अवसर पर दुसरका भोजपुरी कवि सम्मेलन (२८-७-१९) स्थान : हिंदी भवन, आई टी वो नई दिल्ली
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जब मंजल साहित्यकार अउरी साहित्य सिरिजन की ओर बढ़त नवांकुर एके संगे कवनो मंच पर आपन रचना के झींसी से सराबोर क देंस त...
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जरि- पादप मूल।
जर- बुखार।
दीठ/डीठ- नजर।
दोख- कमी, अवगुन, विकार, अपराध।
दुचित- अथिर चित्त, दोपापाही।
धनिया - पत्नी।
कनिया- नवकी बहुरिया, छोट...
अउङ्ह(ई)- अंघी, अउँघी, उँघ।
जाङ्ह- जांघ।
चिन्ह- निशान।
गफ्फा
चूँटी-
च्यूँटी। "चूँटी के पग नेउर...
तातल- गरम।
पाँजर- पार्श्व, बगल।
फोरन- बघार।
सोहाग- सुहाग, आनंद,
कुसलाई, ऐश्वर्य।...
खिंचड़ी- (सं- कृषरिका) खिचड़ी।
भछनी- (सं- भक्षिणी) खा जाएवाली। औरतन
द्वारा प्रयुक्त गारी।
पोखरा- (सं- पुष्कर) जलाशय।
गाँहक- (सं- ग्राहक) खरीददार।
पगहा-...
(थोड़ा बदलाव कइनीं। सबद के मूल ज्ञात होई त उहो देवे के कोसिस करबि। संकेत रही सं=संस्कृत, प्रा=प्राकृत, दे=देशज, अ=अरबी, फा=फारसी।)
नीनि-( सं-निद्रा) नींद।
मतारी-(सं- महत्...
सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक 30 (अप्रैल– जून 2026)
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अनुक्रम
संपादकीय
•संपादकीय - डॉ अनिल चौबे / 5
आपन बात
•आपन बात...






