आदमी- बनचर बनल बा बेचि के सम्मान के जालि अरु जलखर भइल बा भूलि निज पहचान के। चित्त में न चेत बा नीन...
रहि रहि हिय अकुलात, परल मन मनमीता के बात। मूरति सूरति अँखियाँ चमकत सँवरल केश भाल अति दमकत मँहमँह मँहकत गात। सहमत राखत पाँव धरनि पर सकुचत बोलत बयन मृदुल...
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जब मंजल साहित्यकार अउरी साहित्य सिरिजन की ओर बढ़त नवांकुर एके संगे कवनो मंच पर आपन रचना के झींसी से सराबोर क देंस त...
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जरि- पादप मूल। जर- बुखार। दीठ/डीठ- नजर। दोख- कमी, अवगुन, विकार, अपराध। दुचित- अथिर चित्त, दोपापाही। धनिया - पत्नी। कनिया- नवकी बहुरिया, छोट...
अउङ्ह(ई)- अंघी, अउँघी, उँघ। जाङ्ह- जांघ। चिन्ह- निशान। गफ्फा चूँटी- च्यूँटी। "चूँटी के पग नेउर...
तातल- गरम। पाँजर- पार्श्व, बगल। फोरन- बघार। सोहाग- सुहाग, आनंद, कुसलाई, ऐश्वर्य।...
खिंचड़ी- (सं- कृषरिका) खिचड़ी। भछनी- (सं- भक्षिणी) खा जाएवाली। औरतन द्वारा प्रयुक्त गारी। पोखरा- (सं- पुष्कर) जलाशय। गाँहक- (सं- ग्राहक) खरीददार। पगहा-...

सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक 31 (जुलाई-सितम्बर 2026)

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सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक अंक 31 ( जुलाई-सितम्बर 2026) के डाउनलोड करे खातिर क्लीक करीं अनुक्रम संपादकीय •उड़ल जाला बदरा-उमेश चौबे "अश्क“/80 •संपादकीय - डॉ अनिल चौबे...

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