हम नइखी जानत प्रित के पावन परिभाषा का ह?

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1982

हम नइखी जानत प्रित के पावन परिभाषा का ह?
हम नइखी जानत प्रेमी के खुशहाली दशा का ह?
बाकिर ऐकर प्रभाव सभन पर भारी होला,
प्रित के एगो नाम भी दुनियादारी होला I
प्रित में ही राजनिति होला, होला बखेड़ा भारी,
कई जानि एकरे कारण करेलें, औरन से मार- फौदारी।
प्रित पर ही दुनिया टिकल बा, अइसन लोग कहेला,
प्रित के बल पर ही, एक-दुसरे से जुड़ल लोग रहेला।
प्रित प्रेत के काबु करे, प्रित बान्हें भगवान के,
ए लाचारी भरल जिनगी में, प्रित जिअवले रहे इन्सान के।
प्रित केहु के बकसे नाही, इ जबरन बरियारी होला,
प्रित के एगो नाम भी, दुनियादारी होला I

  • संग्राम ओझा “भावेश”

 

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