डाल गलबाँह झुमे भीत प भदकड़ी।
हक्क-बक्क बन निसबद बाड़ी मकड़ी।
पाँखिल पिपरी के, बाग ना अड़ाला,
जोम-जाम-आँधर न लखे उँच-खाला।
बिजुली के रोशनी प लुबुध फतिंगना।
बिसतुइया ता-थैया...
सादर सुमन अराधना,अंजनजी कविराय।
अर्चन पूजन बंदना,पग में सीस झुकाय।।
चंदन के तरु बाग में,गमगम करे बयार।
अंजन जब...
भोजपुरी गीत
पहिन पियरकी चूनर धरती, भरिके हिये हुलास।
लमहर डेगे चलली बान्हे, भरि अँकवारि अकास।
लागे, आइ गइल मधुमास।
गोदी के हरसित, हरियर संतान देखि इतराली
गेहूँ,मकई,मटर,रहर, फल-फूल,लदाइल...
जे बोलेला ओकर जिनगी सँवरि जाला।
मीठ बोली सभका दिल में उतरि जाला।
हरदम रहेला जे साँच में...
हाड़ कँपावे जाड़ा रानी।
बोरसी जोरे बुढ़िया नानी।।
होत पराते नाना जागे।
सनसन सनसन...
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गोंसारी क भूजा भुजावल
मन से ना बिसरे कबहूँ।
कचका चाउर रहतो फाँकीं,
छिटतो जाईं ना डर तबहूँ।
बेर-बेर बरिजे माई कि
जूठ न करिहे खबरदार।
ओकर कहल...
'' साहेब, जतना रोपेआ दिहलीं ओह में बीस परसेंट रउरे गिना लिहलीं। अब आगे के टेबुल पर गिने के परी। एह हिसाब से घर...
काहे एतना कूदत बानीं ए चुनाव में रउआ?
बिना काम के ढहत बानीं पी के रउआ पउआ?
कब से होता धावागोड़ी, अबकी इनहीं कीहें?
केतना हाथ...
सिरिजन तिमाही भोजपुरी ई-पत्रिका अंक 31 (जुलाई-सितम्बर 2026)
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अनुक्रम
संपादकीय
•उड़ल जाला बदरा-उमेश चौबे "अश्क“/80
•संपादकीय - डॉ अनिल चौबे...










